डीएसटीपीएस में ‘हिंदी टिप्पण एवं मसौदा लेखन प्रतियोगिता’ संपन्न
हिंदी कार्यालयीन लेखन को बढ़ावा देने की पहल
अंडाल (दुर्गापुर) : राजभाषा हिंदी के व्यावहारिक प्रयोग को बढ़ावा देने और कार्मिकों में कार्यालयीन हिंदी लेखन-कौशल विकसित करने के उद्देश्य से दामोदर घाटी निगम के दुर्गापुर इस्पात ताप विद्युत केंद्र (डीएसटीपीएस), अंडाल में हिंदी पखवाड़ा-2026 के अंतर्गत चतुर्थ श्रृंखला की ‘हिंदी टिप्पण एवं मसौदा लेखन प्रतियोगिता’ आयोजित की गई।
राजभाषा कार्यान्वयन उप समिति के तत्वावधान में प्लांट परिसर स्थित प्रशिक्षण कक्ष में आयोजित प्रतियोगिता में अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता का उद्देश्य शासकीय कार्यों में हिंदी के सहज, सरल एवं प्रभावी प्रयोग के लिए कार्मिकों को प्रोत्साहित करना तथा टिप्पण एवं मसौदा लेखन के माध्यम से कार्यालयीन भाषा-कौशल को निखारना था।

परियोजना के विभिन्न अनुभागों से हिंदी भाषी एवं हिंदीतर भाषी अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रतियोगिता में सक्रिय सहभागिता की। प्रतिभागियों की सुविधा एवं निष्पक्ष मूल्यांकन को ध्यान में रखते हुए दोनों वर्गों के लिए पृथक मूल्यांकन व्यवस्था रखी गई।
प्रतियोगिता में मो. शमीम अहमद, पतरस हाँसदा, मोनालिसा नायक, रूनु सरकार, सुभाषीश दास, झारेश्वर कुमार, सयानी भौमिक, सतरूपा मुखर्जी, आकाश दीप, हरि शंकर कुमार हरि, अजय कुमार गुप्ता, प्रदीप कुमार, रीना यादव एवं राजेश कुमार सहित अनेक कार्मिकों ने उत्साह के साथ भाग लिया।
कार्यक्रम के सफल संचालन में हिंदी अधिकारी इस्माईल मियाँ, कनिष्ठ अभियंता शुभाशीष गुप्त एवं हिंदी सहायक अशोक कुमार कपूर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राजभाषा प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता कल
हिंदी पखवाड़ा-2026 के अंतर्गत आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए 09 सितंबर 2026 को ‘राजभाषा प्रश्नोत्तरी (क्विज़) प्रतियोगिता’ का आयोजन किया जाएगा। प्रतियोगिता दिव्यज्योति भवन स्थित प्रशिक्षण कक्ष में अपराह्न 3:30 बजे से होगी। हिंदी एवं हिंदीतर भाषी प्रतिभागियों के लिए पृथक मूल्यांकन श्रेणियाँ रखी गई हैं।

डीएसटीपीएस में आयोजित किए जा रहे ये कार्यक्रम राजभाषा हिंदी को केवल औपचारिक कार्यों तक सीमित न रखकर दैनिक कार्यालयीन कार्यों में उसके सहज एवं प्रभावी प्रयोग को बढ़ावा देने की दिशा में सार्थक पहल हैं। ऐसे आयोजन कार्मिकों में हिंदी के प्रति रुचि, आत्मविश्वास एवं रचनात्मकता विकसित करने के साथ-साथ राजभाषा के प्रभावी कार्यान्वयन में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
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