ईसीएल ने वित्तीय एवं परिचालन सुधार की दिशा में तेज किए कदम, 2034-35 तक 81 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य

ईसीएल ने वित्तीय एवं परिचालन सुधार की दिशा में तेज किए कदम, 2034-35 तक 81 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य

सांकतोड़िया : ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) ने वित्तीय एवं परिचालन सुधार को गति देते हुए वित्त वर्ष 2034-35 तक 81 मिलियन टन कोयला उत्पादन का दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित किया है। कंपनी के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक सतीश झा ने सांकतोड़िया स्थित ईसीएल मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कंपनी की वर्तमान स्थिति, सुधारात्मक कदमों और भविष्य की रणनीति की जानकारी दी।

प्रेस वार्ता के दौरान सतीश झा ने कोयला उत्पादन, लाभप्रदता, खदानों के प्रदर्शन, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (R&R), विद्युत चोरी से होने वाली क्षति, खदान बंदी तथा सतत एवं वैज्ञानिक खनन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी और मीडिया प्रतिनिधियों के सवालों के जवाब दिए।

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में ईसीएल ने 52.085 मिलियन टन का रिकॉर्ड कोयला उत्पादन किया। हालांकि, इसी अवधि में कंपनी को लगभग 1,257 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। उन्होंने घाटे के प्रमुख कारणों और बदलती बाजार परिस्थितियों की जानकारी देते हुए कहा कि दिसंबर 2025 से पावर-ग्रेड कोयले की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और देश की ऊर्जा जरूरतें भी लगातार बढ़ रही हैं।

ईसीएल के वित्तीय सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि का उल्लेख करते हुए CMD ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी ने कर-पूर्व लाभ (PBT) हासिल किया है। उन्होंने इसे कंपनी द्वारा किए गए सुधारात्मक उपायों, परिचालन दक्षता और लागत नियंत्रण पर बढ़े फोकस का सकारात्मक परिणाम बताया।

घाटे वाली खदानों के प्रदर्शन में सुधार पर जोर

सतीश झा ने बताया कि घाटे में चल रही खदानों की संख्या में वर्ष-दर-वर्ष कमी आ रही है। वर्तमान में 57 खदानें घाटे में, जबकि 20 खदानें लाभप्रद रूप से संचालित हो रही हैं। खदानों के प्रदर्शन में सुधार के लिए ईसीएल ने खदान-विशिष्ट रणनीति अपनाई है।

इसके तहत 19 खदानों में मास प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी, 7 खदानों के एकीकरण, 4 खदानों में HOE अनुबंधों की शुरुआत, 11 खदानों की रणनीतिक बंदी तथा अन्य खदानों में लागत नियंत्रण एवं परिचालन दक्षता बढ़ाने के उपाय किए जा रहे हैं। CMD ने इन पहलों के सफल क्रियान्वयन में कर्मचारियों की भूमिका की भी सराहना की।

पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन पर विशेष ध्यान

रानीगंज पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन योजना, 2009 पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि पुनर्वास के लिए 138 स्थलों की पहचान की गई है और इसके लिए लगभग 2,661 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि लागू प्रावधानों के अनुसार वैध स्वामित्व अधिकार रखने वाले प्रभावित लोगों को मुआवजा एवं आवास संबंधी लाभ प्रदान किए जाते हैं, जबकि अन्य प्रभावित निवासियों को निर्धारित पुनर्वास ढांचे के तहत लाभ दिया जाता है।

बिजली चोरी से लगभग 250 करोड़ रुपये की वार्षिक क्षति

प्रेस वार्ता में विद्युत चोरी एवं अवैध विद्युत उपयोग से होने वाली वित्तीय क्षति का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। CMD ने बताया कि ईसीएल का वार्षिक विद्युत व्यय लगभग 550 करोड़ रुपये है, जिसमें से करीब 250 करोड़ रुपये की हानि विद्युत चोरी/पिलफरेज के कारण होती है। उन्होंने इस चुनौती से निपटने के लिए प्रभावी निवारक उपायों और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वित कार्रवाई पर जोर दिया।

अवैध खनन पर ड्रोन और ICCC से निगरानी

खदान सुरक्षा और अवैध खनन पर उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन के सहयोग से रैट-होल माइनिंग की घटनाओं पर लगभग पूर्ण रूप से नियंत्रण पाया गया है। ईसीएल द्वारा अवैध खनन एवं कोयला निकासी की रोकथाम के लिए ड्रोन निगरानी और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और CISF की तैनाती बढ़ाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।

वैज्ञानिक खदान बंदी और सतत खनन पर जोर

ईसीएल वैज्ञानिक खदान बंदी और सतत खनन की दिशा में भी नई तकनीकों पर काम कर रही है। कंपनी पारंपरिक सैंड स्टोविंग पर पूर्ण निर्भरता के बजाय खदानों में खाली स्थानों (Mine Voids) को भरने के लिए वैकल्पिक तकनीकों एवं नवीन विधियों की संभावनाओं का अध्ययन कर रही है।

प्रेस वार्ता के समापन पर CMD ने कहा कि ईसीएल का भविष्य परिचालन दक्षता, वित्तीय अनुशासन, कर्मचारी सहभागिता, तकनीकी नवाचार और खनन प्रभावित समुदायों के उत्तरदायी पुनर्वास पर आधारित होगा। कंपनी लाभप्रदता और सतत विकास पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करते हुए 2034-35 तक 81 मिलियन टन कोयला उत्पादन के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रही है।

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