हास्य, व्यंग्य और संवेदना से सजी काव्य-संध्या, तालियों और ठहाकों से गूंजा सभागार

हास्य, व्यंग्य और संवेदना से सजी काव्य-संध्या, तालियों और ठहाकों से गूंजा सभागार

सांकतोड़िया : ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) की ओर से राजभाषा माह का शुभारंभ बुधवार को भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के साथ किया गया। 2 सितंबर को आयोजित इस काव्य-संध्या में हास्य, व्यंग्य, संवेदना और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं ने श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे सुप्रसिद्ध कवियों की प्रस्तुतियों से सभागार साहित्यिक उल्लास, तालियों और ठहाकों से गूंजता रहा।

कार्यक्रम में ECL के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक सतीश झा मुख्य अतिथि तथा कोल इंडिया लिमिटेड के मुख्य सतर्कता अधिकारी ब्रजेश कुमार त्रिपाठी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर ECL के निदेशक (मानव संसाधन) गुंजन कुमार सिन्हा, निदेशक (तकनीकी/योजना एवं परियोजना) गिरीश गोपीनाथ नायर तथा निदेशक (तकनीकी/संचालन) चितरंजन कुमार सहित कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

शताक्षी महिला मंडल की अध्यक्ष किरण झा और उपाध्यक्ष अनुभा सिन्हा की सक्रिय सहभागिता के साथ ECL के अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिजनों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति ने आयोजन को और भव्य बना दिया।

कवि सम्मेलन में कानपुर के सुप्रसिद्ध कवि हेमंत पांडेय, SECL के वरिष्ठ प्रबंधक पाणी पंकज पांडेय, इंदौर की कवयित्री भुवन मोहिनी तथा बाराबंकी के कवि गजेंद्र प्रियांशु ने हास्य, व्यंग्य और समसामयिक विषयों पर आधारित अपनी रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। उनकी प्रस्तुतियों पर लगातार तालियां और ठहाके सुनाई दिए। कोल इंडिया के मुख्य सतर्कता अधिकारी ब्रजेश कुमार त्रिपाठी ने भी अपनी काव्य प्रस्तुति से कार्यक्रम में विशेष रंग भरा। वहीं, ECL के निदेशक (तकनीकी/संचालन) चितरंजन कुमार की भावपूर्ण कविताओं ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

इस अवसर पर ECL के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक सतीश झा ने कहा कि साहित्य और संस्कृति समाज में संवेदनशीलता, रचनात्मकता तथा सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे आयोजन कर्मचारियों और उनके परिवारों को स्वस्थ एवं सार्थक मनोरंजन देने के साथ उन्हें साहित्य, कला और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने राजभाषा के प्रचार-प्रसार और साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए इस तरह के आयोजनों की आवश्यकता पर जोर दिया।

काव्य-संध्या के दौरान हास्य और व्यंग्य की प्रस्तुतियों ने जहां श्रोताओं को खूब हंसाया, वहीं संवेदनशील एवं भावपूर्ण रचनाओं ने उन्हें साहित्य की गहराइयों से जोड़ा। बाहर हो रही हल्की बारिश के बीच आयोजित यह काव्य-संध्या वातावरण में आत्मीयता और सौम्यता का रंग भरती नजर आई।

राजभाषा माह के शुभारंभ पर आयोजित यह अखिल भारतीय कवि सम्मेलन ECL की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण बना। कविता, संवेदना और उल्लास से भरी इस शाम ने कर्मचारियों एवं उनके परिजनों को साहित्य और संस्कृति से जुड़ने का अवसर देने के साथ एक सुखद और यादगार अनुभव भी प्रदान किया।

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