डिजिटल युग में अनुवाद की तकनीकी चुनौतियों और मानवीय संवेदनशीलता पर मंथन

डिजिटल युग में अनुवाद की तकनीकी चुनौतियों और मानवीय संवेदनशीलता पर मंथन

डीवीसी, डीएसटीपीएस में नराकास स्तरीय राजभाषा तकनीकी संगोष्ठी संपन्न

अंडाल (दुर्गापुर)  दामोदर घाटी निगम के दुर्गापुर इस्पात ताप विद्युत केंद्र (डीएसटीपीएस) की राजभाषा कार्यान्वयन उप-समिति की ओर से अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस-2026 के अवसर पर नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), दुर्गापुर के तत्वावधान में एक दिवसीय राजभाषा तकनीकी संगोष्ठी का आयोजन किया गया। डीएसटीपीएस स्थित स्वामी विवेकानंद प्रेक्षागृह में आयोजित संगोष्ठी का विषय ‘डिजिटल युग में अनुवाद : राजभाषा हिंदी के संदर्भ में चुनौतियां, तकनीकी नवाचार और मानवीय संवेदनशीलता’ रहा|

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’, दीप प्रज्ज्वलन और डीवीसी गीत की प्रस्तुति के साथ हुआ। इस अवसर पर अतिथियों का उत्तरीय, हरी पौध और राजभाषा प्रशस्ति-फलक भेंट कर स्वागत किया गया। अनुवाद तथा राजभाषा कार्यान्वयन से संबंधित तीन रंगीन राजभाषा पोस्टरों का भी लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम का संचालन हिंदी अधिकारी इस्माईल मियां ने किया।

उद्घाटन सत्र में डीएसटीपीएस के वरिष्ठ महाप्रबंधक (परिचालन एवं अनुरक्षण) सुखदेव खां ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने राजभाषा के प्रभावी प्रसार और कार्यान्वयन के लिए सभी सदस्यसंस्थानों की सामूहिक सहभागिता को महत्वपूर्ण बताया।

डीवीसी, डीएसटीपीएस के मुख्य महाप्रबंधक एवं परियोजना प्रधान अनिल कुमार जैन ने अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि डिजिटल टूल्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कार्यों को गति प्रदान कर सकते हैं, लेकिन भाषा के संदर्भ, मर्म और संवेदनशीलता को बनाए रखने के लिए मानवीय विवेक आवश्यक है। उन्होंने नराकास के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए सदस्य संस्थानों के समन्वित प्रयास से इसे राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय पहचान दिलाने की बात कही।

राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण प्रतिष्ठान (एनपीटीआई), दुर्गापुर के निदेशक एवं संस्थान प्रमुख डॉ. एन. के. श्रीवास्तव ने कहा कि अनुवाद ज्ञान और संचार के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करता है। डिजिटल तकनीक के विस्तार के दौर में अनुवादकों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

एनपीटीआई के निदेशक मनोज कुमार झा, सीएसआईआर-सीएमईआरआई, दुर्गापुर के वैज्ञानिक-ई डॉ. सत्य प्रकाश सिंह, डीएसटीपीएस के महाप्रबंधक (अनुरक्षण) सत्य रंजन पांडा तथा महाप्रबंधक (परिचालन) अरुंधती मुखर्जी ने भी प्रशासनिक एवं तकनीकी कार्यों में आधुनिक भाषा-प्रौद्योगिकी के संतुलित और व्यावहारिक उपयोग पर विचार रखे।

नराकास सचिवालय, दुर्गापुर इस्पात संयंत्र के वरिष्ठ व्याख्याता डॉ. आशुतोष तिवारी ने संगोष्ठी के विषय की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए तकनीकी युग में अनुवाद की बदलती भूमिका को रेखांकित किया।

तकनीकी सत्र में राष्ट्रीय डिजिटल युग में अनुवाद की तकनीकी चुनौतियों और मानवीय संवेदनशीलता पर मंथनहोम्योपैथिक संस्थान, कोलकाता के परामर्शदाता (राजभाषा एवं संचार) एवं विषय विशेषज्ञ अजयेंद्रनाथ त्रिवेदी ने न्यूरल मशीन ट्रांसलेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल्स, अनुवाद की तकनीकी चुनौतियों तथा मानवीय विवेक के समन्वय पर व्यावहारिक और तथ्यपरक व्याख्यान दिया। इसके बाद आयोजित ‘खुला मंच’ में प्रतिभागियों ने अनुवाद की जटिलताओं और डिजिटल समाधानों को लेकर विशेषज्ञ से संवाद किया।

समापन अवसर पर मुख्य महाप्रबंधक एवं परियोजना प्रधान अनिल कुमार जैन ने उत्कृष्ट राजभाषा कार्यान्वयन के लिए सदस्य संस्थानों को ‘राजभाषा प्रशस्ति फलक’ प्रदान किए। साथ ही प्रतिभागी अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। डीएसटीपीएस के उपमहाप्रबंधक (मानव संसाधन) श्रीकांत गेडेला ने धन्यवाद ज्ञापन किया। राष्ट्रगान के सामूहिक गायन के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ।

संगोष्ठी में नराकास, दुर्गापुर से जुड़े विभिन्न संस्थानों—सीएसआईआर-सीएमईआरआई, एनपीटीआई, एनएसपीसीएल, पावरग्रिड, दुर्गापुर इस्पात संयंत्र, मेकॉन, पंजाब नेशनल बैंक, कर्मचारी राज्य बीमा निगम, केंद्रीय विद्यालय, सीआईएसएफ, केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल सहित अन्य संस्थानों—के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इसके अलावा डीवीसी, डीएसटीपीएस के विभिन्न अनुभागों के अनुभागाध्यक्ष, कार्यालय प्रधान, राजभाषा नोडल अधिकारी, अधिकारी एवं कर्मचारियों की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही।


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